आपकी जेब पर यूं भारी पड़ेगी किसानों की कर्ज माफी

इनपूट-नई दुनिया
June 13 / 2017

किसानों का उग्र आंदोलन देखने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उनका कर्ज माफ कर दिया है। मध्यप्रदेश सरकार ने तो पहले से बिना ब्याज का कर्ज दे रखा था और अब मूल भी माफ करने पर विचार चल रहा है। इसमें कोई शंका नहीं है कि मौजूदा व्यवस्था में किसानों को उनकी खून-पसीने की मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पा रहा है, लेकिन कर्ज माफी इलाज नहीं है। वास्तव में कर्ज माफी का पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा और आम आदमी को ही इसका बोझ उठाना पड़ेगा। एक नजर इसी से जुड़ी जरूरी बातों पर -

यूं होगा सब पर असर

1. आशंका जताई जा रही है कि इस तरह किसानों का कर्ज माफ करने से डिफॉल्टरों को प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार वैसे भी डिफॉल्टरों की बढ़ती संख्या से चिंतित है। बैंकों के 9000 करोड़ डकार कर विजय माल्या के फरार होने के बाद यह मुद्दा गर्मा गया है।

2. मोदी सरकार ने हाल ही में अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए कुछ सख्त फैसले लिए हैं। किफायत वाले कदम भी उठाए हैं। राज्य सरकारें इस तरह कर्ज माफ करेंगी तो केंद्र के ये कदम बेअसर हो जाएंगे।

3. आम आदमी पर सबसे बड़ा असर यह होगा कि इससे महंगाई के बेकाबू होने का खतरा बढ़ेगा। रिजर्व बैंक चाहकर भी ब्याज दरें कम नहीं कर पाएगा।

लगातार बिगड़ रही राज्यों की सेहत

प्रमुख अर्थशास्त्री और आरबीआई के निदेशक बोर्ड के सदस्य राजीव कुमार का कहना है कि किसानों के कर्ज को माफ करना कभी-कभी आजमाया जाने वाला उपाय हो सकता है। लेकिन, मौजूदा माहौल में इसकी उपयोगिता को लेकर चिंता है। दो वर्ष बाद किसानों की तरफ से फिर कर्ज माफी की मांग उठेगी। राज्यों को बताना चाहिए कि इतनी बड़ी राशि का बोझ वे अपने खजाने पर कैसे डालेंगे। इस तरह के कदम आगे चल कर राज्यों की राजकोषीय घाटे की स्थिति को बेहद चिंताजनक बना सकते हैैं।

बीते सालों में राज्यों के रेवेन्यु के साथ-साथ खर्च भी बढ़ा है। इससे राज्यों का घाटा 13 साल में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि लोन माफ करने से देश की बैलेंस शीट बिगड़ जाएगी।

2013 में जो राजकोषीय घाटा जीडीपी का 5 फीसदी था, वो अब घटकर 3 फीसदी पर आ गया है। लेकिन अभी भी डेट-टू-जीडीपी रेश्यो 68 फीसदी है जो विकासशील देशों में सबसे ज्यादा है। इसे घटाकर अगले तीन साल में 60 फीसदी तक लाना होगा, लेकिन कर्ज माफी जैसे कदम बड़ी अड़चन पैदा करेंगे।

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